केरल गरीबी मुक्त राज्य बना: CM ने EPEP के तहत ऐलान, भारत का पहला ऐसा राज्य
तिरुवनंतपुरम, 3 नवंबर 2025: केरल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार (1 नवंबर) को राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में घोषणा की कि केरल अब अत्यधिक गरीबी (एक्सट्रीम पॉवर्टी) से मुक्त हो गया है, जो भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है। यह घोषणा केरल पिरवी (राज्य गठन दिवस) के अवसर पर की गई, जिसे सीएम ने "नए युग की शुरुआत" बताया।
घोषणा का विवरण
EPEP प्रोजेक्ट: एक्सट्रीम पॉवर्टी एराडिकेशन प्रोग्राम (EPEP) को 2021 में वर्तमान एलडीएफ सरकार के पहले कैबिनेट बैठक में शुरू किया गया था। चार वर्षों की मेहनत के बाद, 64,006 परिवारों (1,03,099 लोग) को गरीबी से बाहर निकाला गया।
मुख्य पहल:
21,263 लोगों को आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे बुनियादी दस्तावेज प्रदान किए।
20,648 परिवारों को कुदुम्बश्री के माध्यम से नियमित भोजन आपूर्ति सुनिश्चित।
स्वास्थ्य सेवाएं, दवाएं, टीकाकरण, पलायटिव केयर और अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था।
2,210 परिवारों को पके हुए भोजन, 18,438 को फूड किट्स वितरित।
आपातकालीन सहायता के 21,263 मामले सुलझाए।
खर्च: सरकार ने EPEP पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक व्यय किया। स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, कुदुम्बश्री, आशा-अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से ग्राउंड-लेवल सर्वे व माइक्रो-लेवल प्रोजेक्ट्स चलाए गए।
आंकड़ों का आधार
एनआईटीआई आयोग की 2023 मल्टी-डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) रिपोर्ट के अनुसार, केरल की आबादी का मात्र 0.55% बहुआयामी गरीबी में जी रहा है, जो देश में सबसे कम है। विश्व बैंक के मानदंड (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 रुपये से कम) से आगे, केरल ने भोजन, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आय जैसे व्यापक मानकों पर फोकस किया।
सीएम का संबोधन
विधानसभा में बोलते हुए विजयन ने कहा, "आज का केरल पिरवी इतिहास में स्थान बनाता है, क्योंकि हमने केरल को अत्यधिक गरीबी से मुक्त पहला भारतीय राज्य बना दिया। यह उपलब्धि पूरे केरलवासियों की है।" उन्होंने 1970 के दशक के यूएन रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि तब केरल गरीबी और जनसंख्या वृद्धि से जूझ रहा था, लेकिन दशकों की सुधारों से यह संभव हुआ। सीएम ने जोर दिया कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस-नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने घोषणा को "शुद्ध धोखा" और "चुनावी प्रचार" बताते हुए विशेष सत्र का बहिष्कार किया। विपक्ष नेता वी.डी. सतीशान ने कहा, "मेनिफेस्टो में 4.5 लाख गरीबों का जिक्र था, अब यह 64,000 कैसे हो गया? यह सदन के नियमों का अपमान है।" स्थानीय निकाय चुनावों से पहले इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए गए।
महत्व और भविष्य
स्थानीय स्वशासन मंत्री एम.बी. राजेश ने इसे "पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण प्रक्रिया" बताया, जो नवा केरल के विजन को मजबूत करती है। सरकार अब नियमित मॉनिटरिंग से परिवारों को दोबारा गरीबी में न गिरने देगी। केरल पहले ही पूर्ण साक्षर, डिजिटल साक्षर और विद्युतीकृत राज्य है—यह उपलब्धि इसे कल्याणकारी प्रयोगशाला के रूप में स्थापित करती है।
यह कदम भारत की गरीबी उन्मूलन यात्रा में मील का पत्थर है।
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